यह लेख भारत में बाल साहित्य के विकास का एक ऐतिहासिक अवलोकन प्रस्तुत करता है, जिसमें स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद के काल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें विभिन्न विधाओं में प्रचलित समकालीन प्रवृत्तियों, तथा गुणवत्ता एवं प्रामाणिकता से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई है।