हम सेवा क्यों करते हैं इसकी पाँच वजहें
इस लेख में स्वयंसेवकों की कुछ महत्वपूर्ण प्रेरणाओं पर चर्चा की गई है। जैसे की - अहंकार का खोना और प्रचुरता (अबन्डन्स) महसूस करना, कृतज्ञता व्यक्त करना, खुद को बदलना, अंतर्संबंधों को खोजना और उनका सम्मान करना और अपने प्राकृतिक विकास के साथ तालमेल बिठाना। यह लेख स्वयंसेवा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने की एक कोशिश है।

सर्विसस्पेस के समन्वयकों द्वारा यह लेख 27 दिसम्बर, 2011 को मूल रूप से servicespace.org पर प्रकाशित हुआ था।
1990 में जब कई कम्पनियाँ इंटरनेट पर अपनी-अपनी वेबसाइट लॉन्च कर रही थीं, हममें से कुछ लोग बिना-शर्त देने के उद्देश्य से बेघर लोगों के एक शरणस्थल में गए। उस समय हम बीस के आसपास की उम्र वाले युवा थे। हम ऐसा क्यों करना चाहते थे? हम बस किसी की सेवा करना चाहते थे। यहाँ ‘सेवा’ (service) शब्द निःस्वार्थ भाव से देने की प्रथा को दर्शाता है। और हम सभी इसका अभ्यास कर सकते हैं, चाहे हम जो भी हों या फिर हम जो भी काम करते हों। बेघरों के आश्रय स्थल पर हमारे दौरे का नतीजा यह हुआ कि हमने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनके लिए एक वेबसाइट बनाई। देने का यह प्रयोग सर्विसस्पेस नाम के संगठन के रूप में सामने आया। समय के साथ सर्विसस्पेस ने हज़ारों छोटे-छोटे गैर सरकारी संगठनों के लिए वेबसाइट तैयार करके उन्हें उपहार के तौर पर पेश कीं। लेकिन यह लहर यहीं नहीं थमी। अब सर्विसस्पेस दर्ज़नों ‘उपहार-आधारित’ अर्थव्यवस्थाओं की परियोजनाओं के लिए एक असाधारण स्थान बन गया है और लाखों लोगों तक पहुँच रहा है।
इन परियोजनाओं से सीधे तौर पर अद्भुतअसर हो ही रहा है, पर सबसे खास बात यह है कि सर्विसस्पेस किसी से पैसा नहीं लेता, इसमें कोई कर्मचारी नहीं हैं और यह संगठन पूरी तरह से स्वयंसेवकों द्वारा ही संचालित किया जाता है। इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति सेवा को गहराई में समझने और अमलमें लाने की इच्छा से प्रेरित है। एक ऐसी दुनिया में जिसमें आर्थिक प्रोत्साहनों का ही बोलबाला है, जिससे उपभोग करने की मानसिकता को बढ़ावा मिलता है, सर्विसस्पेस का दृष्टिकोण मुख्यधारा की सोच के एकदम विपरीत है। यह उदारता के छोटे-छोटे कार्य करने और लोगों को धीरे-धीरे उद्देश्यपूर्ण योगदान के बारे में सोचने के लिए आमंत्रित करता है।
यह एक सुन्दर-सी सच्चाई है कि उपदारता को अमल में लाने के दौरान हम अपनी इस समझ को और गहरा कर पाते हैं कि किस तरह से अन्दरूनी और बाहरी बदलाव आपस में जुड़े हुए हैं। सेवा करने की जिन पाँच वजहों को हमने अपने इस सफर से खोजा है, वे कुछ इस प्रकार हैं:
1. विपुलता (अबन्डन्स) के अहसास् के लिए सेवा: मैं से हम की ओर क्रान्तिकारी बदलाव
जब आप सेवा करते हैं, तो आप पाते हैं कि आपके पास देने के लिए जो सबसे महत्त्वपूर्ण चीज़ें हैं वे असल में चीज़ें हैं ही नहीं। आप अपने पास मौजूद विविध तरह के संसाधनों – आपका समय, आपकी मौजूदगी, आपका ध्यान को उजागर करने लगते हैं और आपको समझ आता है कि देने की आपकी क्षमता केवल भौतिक संसाधनों से नहीं आपकी भावनाओं और विचारों से उपजती है। जब आप ऐसी मानसिकता रखते हैं तो हर क्षण सेवा की नई-नई सम्भावनाएँ देख पाते हैं, आप हर जगह सेवा करने के विनम्र अवसर तलाशने लगते हैं।
यह प्रक्रिया ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर बदलाव की शुरुआत करती है। आप लोगों और परिस्थितियों को इस नज़र से देखने लगते हैं कि आप उन्हें क्या दे सकते हैं, न कि इस नज़र से कि वे आपको क्या दे सकते हैं। आप “इससे मुझे क्या हासिल होगा? जैसे प्रश्नों के थका देनेवाले नियंत्रण से खुद को आज़ाद कर पाते हैं।” मानसिकता उपभोग से योगदान की ओर बदल जाती है। विडम्बना यह है कि इस तरह से निःस्वार्थ भाव से सेवा करने पर आपके अभाव दूर हो जाते हैं। आप इतने भरे-पूरे महसूस करने लगते हैं कि उस सन्तुष्टि को दूसरों के साथ साझा कर पाते हैं।
2. कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सेवा

ऐसी आनंदपूर्ण कृतज्ञता सेवा कार्य का आधार बन जाती है। जब आप अपने जीवन की पूर्णता को स्वीकार करते हैं, तो आप किसी भी परिस्थिति में सेवा का भाव प्रकट कर सकते हैं। इस अर्थ में, सेवा तब शुरू नहीं होती जब हमारे पास देने के लिए कुछ होता है – यह स्वाभाविक रूप से तब पनपती है जब हमारे पास लेने के लिए कुछ नहीं बचता। और यह (जीवन की) एक प्रभावशाली स्थिति है।
हाँ यह सच है कि दुनिया की प्रगति के लिए दिखाई देनेवाला बदलाव ज़रूरी होता है, लेकिन अगर इसके साथ-साथ अन्दरूनी बदलाव भी हो तो यह दुनिया को काफी अलग तरह से बदल सकता है। “हम कोई महान कार्य नहीं कर सकते, केवल छोटे कार्यों को ही बड़े प्रेम से कर सकते हैं,” ऐसा कहना है मदर टेरेसा का। वह एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने लाखों लोगों की ज़िन्दगियाँ बदल दीं। यह इस पर निर्भर करता है कि हम किस पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। या दूसरे शब्दों में कहें तो जो हम करते हैं केवल वह ही महत्त्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि असल में हमारे कार्य के पीछे की आन्तरिक प्रेरणा मायने रखती है।
3. खुद में बदलाव लाने के लिए सेवा
जब हम दूसरों की मदद करने के उद्देश्य से कोई छोटा-सा कार्य भी करते हैं, चाहे वह किसी के लिए दरवाज़ा खोलना ही क्यों न हो, जब हम इसे पूरे दिल से यह सोचते हुए करते हैं कि “शायद मैं इस इन्सान के काम आ सकता हूँ”, तो इस प्रकार की पेशकश आत्म-केन्द्रित होने की गहरी आदत को बदल देती है। उस छोटे से क्षण में दूसरे पर ध्यान होता है। इस तरह से दूसरे के बारे में सोचने से खुद के बारे में सोचने का अहंकारी तरीका कमज़ोर हो जाता है। अहंकार असल में ऐसी प्रवृत्तियों या संग्रह होता है, जो बिना जाँची-परखी होती हैं, खुद पर केन्द्रित होती हैं और हमारे निर्णयों को इस तरह के प्रभावित करती हैं कि हमें इसका पता तक नहीं चलता। यही वजह है कि सच्चे भाव से किया गया सेवा का कोई भी कार्य कभी भी व्यर्थ नहीं जा सकता।
इस तरह से बिना-शर्त सेवा करने के लिए अभ्यास और निरन्तर प्रयास की ज़रूरत होती है। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे सेवा के बारे में हमारी समझ गहरी होती है, हम महसूस करने लगते हैं कि उदारता के हरेक कार्य में हमारे अन्दर बदलाव लाने की क्षमता होती है। हम यह समझ पाते हैं कि, “किसी को देने से असल में हमें कुछ हासिल होता है।” आप इस विचार को बौद्धिक रूप से नहीं बल्कि अनुभव के ज़रिए अपनी ज़िन्दगी में भी आत्मसात करने लगते हैं।

4. हमारे गहन अंतर्संबंध को सम्मान देने के लिए सेवा
समय के साथ, सेवा के छोटे-छोटे कार्य, क्षण हमें एक अलग ही अवस्था में पहुँचा देते हैं। एक ऐसी अवस्था जिसमें सेवा करना बहुत सरल और आसान हो जाता है। और जैसे-जैसे ये जागरूकता बढ़ती है, आप स्वाभाविक रूप से खुद से परे आसपास की दुनिया की परवाह करने लगते हैं। सेवा का हरेक छोटा-सा कार्य एक अविरल तरंग है जो अनगिनत अन्य सेवा-कार्यों के साथ तालमेल बिठाता है।
जैसा कि रेचेल नाओमी रेमेन कहती हैं, “जब आप मदद करते हैं, तो आप जीवन को कमज़ोर समझते हैं। जब आप सुधार करते हैं, तो आप जीवन को टूटा हुआ देखते हैं। जब आप सेवा करते हैं, तो आप जीवन को संपूर्ण देखते (मानते) हैं।” इस समझ के साथ हम अपनी भूमिका निभाना शुरू करते हैं – सबसे पहले हम हमें जो मिल रहा है उसे लेकर सचेत होकर, फिर हम उन चीज़ों के प्रति एहसानमन्द महसूस करते हैं और आखिर में हमें उपहार स्वरूप जो भी हासिल हुआ उसे हम खुशी-खुशी दूसरों को पेश करना जारी रखते हैं। हममें से हरेक के पास ये उपहार हैं: कौशल, भौतिक संसाधन, सम्पर्क, मौजूदगी, हम खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि हमारे पास यह सब है। और जब हम अपने इन उपहारों को सेवा के साधन के तौर पर इस्तेमाल करने लगते हैं, तो रिश्तों के बारे में हमारी समझ गहरी होती है और हम दूसरों व दुनिया के साथ व्यापक तौर पर जुड़ पाते हैं।”
5. प्राकृतिक स्वभाव जुडने के लिए से सेवा

जब हम ज़्यादा से ज़्यादा सेवा करने का विकल्प चुनते हैं तो हमें नई अन्तर्दृष्टि हासिल होती है। ऐसे में हम यह समझ पाते हैं कि मौजूदा हालात की ज़रूरत क्या है, हम एक व्यापक उद्देश्य के साथ जुड़ पाते हैं। नतीजन हम ज़्यादा सहजता और आसानी से कार्य कर पाते हैं। जब लोगों का एक समूह इस प्रकार से सेवा करता है, तो एक इकोसिस्टम बन जाता है, जो मूल्य स्वाभाविक रूप से उभरने के लिए जगह बनाता हैं। स्वाभाविक रूप से जो भी मूल्य उभरते हैं, अर्थात जो तरंग जैसा प्रभाव पैदा होता है, उनके पास अन्य तरंगों से जुड़ने का समय और अवसर होता है और वे अन्य तरंगों के साथ पूरी तरह तालमेल बैठाते हुए एकदम अप्रत्याशित प्रभाव पैदा कर पाते हैं। और इस तरह से ये तरंगे अप्रत्याशित परिणामों को जन्म देती रहती हैं। इस तरह के तंत्र कई अपनी योजनाएँ और रणनीतियाँ हो सकती हैं, लेकिन इसमें एक साथ मिलकर कुछ रचने पर अधिक ज़ोर होता है। तो इस तरह, सालों तक बहुत-सी तरंगे अनदेखी रह जाती हैं; कुछ शायद सातवीं पीढ़ी द्वारा किए जानेवाले परोपकार का आधार बनें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि ये बिना-शर्त दिए जानेवाला उपहार हैं।
हममें से हर कोई व्यक्तिगत स्तर पर ऐसी छोटी-छोटी सेवाएँ दे सकता है जो अंततः गहरे बदलाव के लिए ज़मीन तैयार कर सकें। बदलाव की शुरुआत आपसे और मुझसे होती है।
हिन्दी अनुवाद: शहनाज़

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