उन्नति संस्थान की वेलबीइंग सम्बन्धी प्रथाएँ
The article by Santosh Lonkar discusses a few of the key and effective well-being practices of the organization he works with.

वर्तमान युग में हर किसी को मानसिक, भावनात्मक और व शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। डिजिटल प्रौद्योगिकी के कारण लगातार कनेक्टेड रहने का तनाव, व्यक्तिगत जीवन के लिए कम समय, व्यक्तिगत सम्बन्धों में कमी, अनियमित जीवनशैली, सन्तुलित आहार की कमी, काम का बढ़ता हुआ तनाव और कम एकाग्रता के कारण हर किसी का वेलबीइग प्रभावित हो रहा है। इसलिए हर किसी को अपने वेलबीइंग में सुधार के लिए जागरूक होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए हम विशेषज्ञ संगठनों और व्यक्तियों से मार्गदर्शन हे सकते हैं। उन्नति सगठन अपने कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के वेलबीइंग को प्राथमिकता पर रखते हुए इसमें बेहतरी का प्रयास कर रहा है। इस लेख में हम इसके बारे में अधिक जानेंगे। युग में हर किसी को मानसिक, भावनात्मक और व शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। डिजिटल प्रौद्योगिकी के कारण लगातार कनेक्टेड रहने का तनाव, व्यक्तिगत जीवन के लिए कम समय, व्यक्तिगत सम्बन्धों में कमी, अनियमित जीवनशैली, सन्तुलित आहार की कमी, काम का बढ़ता हुआ तनाव और कम एकाग्रता के कारण हर किसी का वेलबीइग प्रभावित हो रहा है। इसलिए हर किसी को अपने वेलबीइंग में सुधार के लिए जागरूक होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए हम विशेषज्ञ संगठनों और व्यक्तियों से मार्गदर्शन हे सकते हैं। उन्नति सगठन अपने कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के वेलबीइंग को प्राथमिकता पर रखते हुए इसमें बेहतरी का प्रयास कर रहा है। इस लेख में हम इसके बारे में अधिक जानेंगे।
उन्नति संगठन पिछले 11 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहा है। इस दौरान कर्मचारियों में विभिन्न शारीरिक और मानसिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही थी। इन समस्याओं को दूर करने की हम अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमें बहुत सफलता नहीं मिल रही थी। हमे हमेशा एक विशेषज्ञ मार्गदर्शक वा परामर्शदाता की आवश्यकता महसूस होती थी। इस सन्दर्भ में वर्ष 2022 में विप्रो के जरिए हमें यह अवसर मिला। हमें पता चला कि बेंगलुरु स्थित विरितरी संगठन वेलबीइंग पर काम करता है और वे इस विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन करने वाले हैं। हमने जल्दी से जानकारी एकत्र की और हमारे संगठन के तीन लोगों ने इस कार्यशाला के लिए पंजीकरण किया।
कार्यशाला को दो चरणों में आयोजित किया जाना था। इसमें व्यक्तिगत वेलबीइंग और संगठनात्मक बेलबीइंग विषय शामिल थे। चूंकि वह कोविड का समय था इसलिए पहला चरण आभासी रूप से और दूसरा चरण बेंगलुरु में व्यक्तिगत रूप से आयोजित किया गया।
विरिडस संगठन ने व्यक्तिगत वेलबीइंग पर आधारित मॉड्यूल को बहुत अच्छी तरह से तैयार किया है। हमने इससे बहुत कुछ सीखा। व्यक्तिगत बेलबीइंग की पहल अप्रैल 2022 से हुई। कार्यशाला को चार दिनों में चार आभासी सत्रों ने आयोजित किया गया। कार्यशाला की शुरुआत वेलबीइंग क्या है. इस पर चर्चा से हुई और इसकी अवधारणाओं को स्पष्ट किया गया। बेलबोइंग बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं और उपक्रमों पर चर्चा की गई। विभिन्न गतिविधियों और सामग्रियों से इन प्रक्रियाओं को समझाने में मदद मिली।
हमने जाना कि नकारात्मक परिस्थितियों में हमारा दिमाग नकारात्मक भावनाओं का अनुभव करता है। ऐसी स्थितियों में हम सकारात्मक रूप से नहीं सोच पाते। नकारात्मकता से वापस सकारात्मकता की ओर लौटने के लिए भावनाओं की जाँच करना, चिन्तन करना और प्रियजनों के साथ बिताए गए प्यारे क्षणों, पसन्दीदा स्थानों, जानवरों, प्रकृति आदि जैसे उपकरणों का उपयोग करना नकारात्मकता को खत्म करने और फिर से सामान्य होने में हमारी मदद कर सकता है। यह वेलबीइंग के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी अभ्यास था।
इसके अलावा, आत्म-करुणा और पोषक सम्बन्धों को बढ़ावा देनेवाले संत्र बहुत प्रभावी ढंग से आयोजित किए गए। इसके अलावा, विरिडस ने कुल 7 प्रैक्टिस सर्कल्स का आयोजन किया। ये प्रेक्टिस सर्कल्स विषय की समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर, विरिडस की विषय विशेषज्ञता की हम सराहना करते हैं।
हमारे संगठन में किए गए प्रयोग
विरिडस से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद हमें ऐसा महसूस हुआ कि यह प्रशिक्षण हमारी टीम के साथ साझा किया जाना चाहिए क्योंकि यह सभी के लिए लाभकारी होगा। इसी आत्मविश्वास के साथ हमने वेलबीइंग पर सत्रों की योजना बनाई।
वेलबीइंग विषय हमारे कार्यकर्ताओं के लिए नया था। चूँकि सभी कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्र से थे, उन्होंने इस विषय के बारे में न तो कभी सुना था और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी थी। ऐसे में इस विषय को उनके बीच कैसे प्रस्तुत किया जाए और इस पर बातचीत को कैसे आगे बढ़ाया जाए, यह हमारे लिए एक चुनौती थी। इस पर हमने विचार-मंथन कर कुछ समाधान निकाले। सबसे पहले यह तय किया गया कि भाषा ऐसी हो जो सभी को समझ में आए और विषय की सभी बातों को एक ही सत्र में न लेकर अलग-अलग सत्रों में उन पर बातचीत की जाए।
सत्र की योजना बनाने के बाद, पहले सत्र में अधिक समय इस पर चर्चा में गया कि वेलबीइंग का मतलब क्या है। यह आवश्यक भी था क्योंकि हमारे कार्यकर्ताओं के पास इस विषय की कोई भी जानकारी नहीं थी। विषय को आगे समझने के लिए इसकी नींव मज़बूत करना जरूरी था।
ग्राउंडिंग प्रैक्टिस और इमोशनल चेक-इन्स
अपने वेलबीइंग के लिए नियमित रूप से ग्राउंडिंग प्रैक्टिस करना और अपनी भावनाओं को पहचानकर नकारात्मक भावनाओं को समझदारी से दूर करना बहुत जरूरी होता है। हमने अपने कार्यकर्ताओं के साथ यह अभ्यास किया।
प्रत्येक कार्यकर्ता ने अपने जीवन के एक कठिन प्रसंग को अपनी डायरी में लिखा और इस बात पर विचार किया कि उन्होंने उस स्थिति से स्वयं को कैसे बाहर निकाला। इसके बाद, कार्यकर्ताओं को जोड़ी बनाकर उन्हें एक-दूसरे के साथ अपने कठिन अनुभव साझा करने के लिए कहा गया। यह अभ्यास भावनात्मक रूप से सभी को छू गया।
अन्त में, सामूहिक चर्चा के दौरान हर किसी ने अपने अनुभव साझा किए। एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘आज मैंने अपने जीवन में हुई बुरी घटनाओं के बारे में किसी के साथ खुलकर बात की। इससे मेरे मन का बोझ हल्का हो गया।”
इस अभ्यास के दौरान, कई कार्यकर्ताओं ने अपने मन में जमा नकारात्मक भावनाओं को आँसुओं के माध्यम से बाहर निकाल दिया। यह अभ्यास बहुत उपयोगी साबित हुआ। अब हम हर बैठक की शुरुआत इस अभ्यास से करते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं को अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त करने का एक मंच मिलता है।

रिश्तों को मज़बूत कैसे करें?
संगठन में काम करते समय अक्सर कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद हो जाते हैं या उन्हें एक-दूसरे से कोई शिकायत होती है, लेकिन वे इसे सीधे तौर पर व्यक्त नहीं करते। इसका सीधा असर काम की गुणवत्ता पर पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए हमने. ‘रिश्तों को मज़बूत कैसे करें’ इस विषय पर एक सत्र आयोजित किया। इसमें यह चर्चा की गई कि अगर आपसी भावनाएँ व्यक्त नहीं की जाती हैं, तो ये वेलबीइंग को कैसे प्रभावित करती हैं।
सत्र में हर कार्यकर्ता को जोड़ी में बाँटा गया और एक-दूसरे के बारे में जो बातें उन्हें खटकती थीं, उन पर खुलकर बात करने को कहा गया। उन्हें यह निर्देश दिया गया कि जब कोई प्रतिक्रिया दे, तो सामने वाला व्यक्ति कोई सफ़ाई न दे। प्रत्येक जोडी ने यह प्रक्रिया पूरी की और फिर अपनी जोडी बदलकर इसे नए साथी के साथ दोहराया।
इस प्रक्रिया ने कार्यकर्ताओं के मन में दबे हुए भावनात्मक तनाव को बाहर निकालने में मदद की। सामूहिक चर्चा में सभी ने अपने अनुभव साझा किए। इस सत्र के बाद, कार्यकर्ताओं के बीच खुलापन आया और अब वे एक-दूसरे से अपनी शिकायतों पर बिना हिचकिचाहट बात करने लगे हैं। यदि वे इसे अकेले हल नहीं कर पाते, तो वरिष्ठो की मदद भी लेते है।
संस्थान में नियमित रूप से की जाने वाली प्रथाएँ
- प्रत्येक बैठक की शुरुआत ग्राउंडिंग प्रैक्टिस से की जाती है, जिसमें सभी अपनी उस समय की भावनाओं को व्यक्त करते हैं।
- यदि किसी ने संस्थान के काम या व्यक्तिगत कार्य में किसी की मदद की है, तो उसके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए संस्थान के कार्यालय में ‘ग्रेटीट्यूड जार’ रखा गया है। लोग इसमें अपनी कृतज्ञता लिखकर डालते हैं। इस जार को प्रत्येक स्टाफ मीटिंग के दिन खोला जाता है और लोगों द्वारा लिखकर इसमें डाली गई बातों को सभी के सामने पढ़ा जाता है।
- संस्थान में वरिष्ठों द्वारा लिए जानेवाले निर्णयों में अन्य सदस्यों की राय ली जाती है।
- प्रत्येक कार्यालय में चाय पे चर्चा’ नाम से एक पहल चलाई जाती है, जिसमें चाय के ब्रेक के दौरान 10-15 मिनट अनौपचारिक बातचीत के लिए दिए जाते हैं।
कार्यकर्ताओं को हुए लाभ
- कार्यकर्ता अब अपने मन में खटकनेवाली बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने लगे हैं।
- वे सहकर्मियों द्वारा की गई मदद के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
- सभी के बीच एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित हुई है।
- एक-दूसरे की मदद करने की संस्कृति बढ़ी है।
हमारे सामने आई चुनौतियाँ
वेलबीइंग प्रक्रिया को लागू करते समय हमें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
- प्रत्येक सत्र में पिछले सत्र का संक्षिप्त पुनरावलोकन किया गया। इससे नए जुड़े कार्यकर्ताओं को पिछले सत्रों की अवधारणाएँ स्पष्ट नहीं हो सकी, और उनकी सत्र में उत्साहजनक भागीदारी नहीं रही।
- वेलबीइंग की अवधारणाओं को समझाना कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ा कठिन रहा, जिसके लिए अधिक समय लगाना पड़ा।
- संस्थान के वरिष्ठ कार्यकर्ता ही वेलबीइंग सत्रों को अपनी दिनचर्या और कामकाज में लागू कर पाए हैं। अन्य कार्यकर्ताओं की विषय की समझ अब तक पूरी तरह विकसित नहीं हुई है।
भविष्य की योजना
हमें लगता है कि वेलबीइंग सत्रों की आवृत्ति बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इसे और प्रभावी ढंग से कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया जा सके। अब तक किए गए सत्रों से हमें निश्चित रूप से लाभ हुआ है। भविष्य में भी हम सभी कार्यकर्ताओं के वेलबीइंग को प्राथमिकता देते रहेंगे।
धन्यवाद!
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