नागरिक विज्ञान की पहलों के ज़रिए ज्ञान के लोकतांत्रीकरण के अनेक तरीके

School children birdwatching in the Anaimalai Hills
यह लेख नागरिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रकाशित एक किताब के बारे में है। साथ ही, इसमें नागरिक विज्ञान के कुछ व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले मंचों के बारे में जानकारी दी गई है।
नागरिक विज्ञान के मंच डेटा के संग्रह, उसके विश्लेषण और नई चीज़ों की खोज में आम लोगों को भागीदार बनाकर वैज्ञानिक शोध को और ज़्यादा लोकतांत्रिक और लोगों के लिए आसानी से इस्तेमाल करने योग्य बनाते हैं। ये पहलें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को खगोल विज्ञान, पारिस्थितिकी, पुरातत्व विज्ञान, और जैव विविधता जैसे विविध क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान में सार्थक योगदान देने में सशक्त बनाती हैं।
बर्डकाउन्ट इंडिया, ईबर्ड, ग्लोब एट नाइट, हेरिटेज क्वेस्ट और ज़ूयूनिवर्स जैसे मंच पेशेवर शोधकर्ताओं और आम जनता के बीच की खाई को पाटते हैं। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि मूल्यवान वैज्ञानिक डेटा को इतने पैमाने पर और इतनी बारीकी से एकत्र किया जाए जो अन्यथा असम्भव होता। ये मंच आम लोगों को मिलकर काम करने और सक्रिय रूप से भागीदारी करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह प्रक्रिया वैज्ञानिक शोध को बेहतर बनाती है और आम लोगों में विज्ञान और प्रकृति व पर्यावरण के संरक्षण के प्रयासों को लेकर गहरी समझ विकसित करती है।
इस लेख में कुछ नागरिक विज्ञान प्लेटफॉर्म्स का संक्षिप्त विवरण दिया गया है। इसकी शुरुआत ‘फर्स्ट स्टेप्स’ नाम की किताब के बारे में संक्षिप्त चर्चा से होती है। यह एक ऐसी किताब है जो भारत में पारिस्थितिकी से जुड़े अनुसन्धान के क्षेत्र में नागरिक विज्ञान के तेज़ी से बढ़ते हुए क्षेत्र का गहराई से समझाती है।
किताब के बारे में संक्षिप्त जानकारी
‘फर्स्ट स्टेप्स’ 150 पन्नों की एक छोटी-सी किताब है। इस किताब के लेखकों ने अपने डेढ़ साल के शोध को आधार बनाते हुए देशभर में चल रही 17 नागरिक विज्ञान परियोजनाओं का दस्तावेज़ीकरण और विवरण प्रस्तुत किया है। इसके तहत उन्होंने ये परियोजनाएँ कैसे शुरू हुईं, कैसे बदल रही हैं, इन्हें चलाने में आनेवाली चुनौतियों और आगे बढ़ने के रास्तों पर प्रकाश डाला है।
द्वितीय-स्तर का यह अध्ययन (second-order study) विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अध्ययन और ज्ञान के समाजशास्त्र के व्यापक सैद्धान्तिक ढाँचों के भीतर स्थित है। यह भारत में नागरिक विज्ञान की पहलों को परिभाषित करने वाली बुनियाद धारणाओं, पद्धतियों और संस्थागत ढाँचों की गहराई से पड़ताल करता है।
इस किताब का प्रारूप एक खास ढंग का है। इसमें विवरण को कहानी के रूप में भी दिया गया है और व्यवस्थित तरीके से तालिकाएँ भी बनाई गई हैं।

पंकज सेखसरिया और नवीन थायिल. 2022. फर्स्ट स्टेप्स: सिटिज़ेन साइंस इन इकॉलॉजी इन इंडिया. डीएसटी सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, आईआईटी दिल्ली, ऑथर्सअपफ्रंट
यह सुनिश्चित करता है कि पाठक इसमें दी गई अन्तर्दृष्टियों को अपनी सुविधा के अनुसार आसानी से समझ सकें। इन 17 परियोजनाओं के ज़रिए महत्वपूर्ण विकासों का विश्लेषण करके ‘फर्स्ट स्टेप्स’ किताब इस बात की बुनियादी समझ प्रदान करती है कि भारत में नागरिक विज्ञान की शुरुआत कैसे हुई और समय के साथ इसमें कैसे बदलाव आया। इसके साथ ही यह इसकी समझ भी प्रदान करती है कि पारिस्थितिकी से जुड़ा शोध भविष्य में किस दिशा में जा सकता है।
भारत-आधारित प्लेटफॉर्म्स
बर्ड काउंट इंडिया: यह एक नागरिक विज्ञान पहल है, जो भारत में पक्षियों की आबादी को समझने और संरक्षित करने के लिए डेटा को एकत्रित करने और उसे साझा करने के लिए समर्पित है। मूल्यवान जानकारी को उत्पन्न करने के लिए देशभर के पक्षी प्रेमियों को शामिल करके यह साधारण अवलोकनों और व्यवस्थित सर्वेक्षणों दोनों को सम्भव बनाता है।
व्यक्तियों, संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर बर्ड काउंट इंडिया पक्षियों की जानकारी को बहुत बारीकी से जगह और समय के हिसाब से सबके लिए आसानी से उपलब्ध कराने के साझे लक्ष्य की दिशा में काम करने वाले विभिन्न समूहों के व्यापक नेटवर्क के लिए एक छतरी की तरह कार्य करता है। यह सामूहिक प्रयास देशभर में पक्षियों के संरक्षण और पारिस्थितिक अनुसन्धान में योगदान देता है।
सिटिज़ेन साइंस इंडिया: यह एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो उन परियोजनाओं को एक साथ लाता है जहाँ आम लोग शोधकर्ताओं के साथ मिलकर वैज्ञानिक खोजों में योगदान देते हैं। इन परियोजनाओं में जैव विविधता, पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक विज्ञान जैसे विविध विषय शामिल हैं और ये व्यक्तियों को डेटा एकत्र करने, उनसे प्राप्त निष्कर्षों का विश्लेषण करने और सार्थक शोध में शामिल करने के लिए उन्हें सशक्त बनाती हैं।
किसी भी पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता के प्रतिभागी वन्यजीवन का अवलोकन करके, पर्यावरण में होने वाले बदलावों को दर्ज करके और डेटा के वर्गीकरण में मदद करके इसमें अपना योगदान दे सकते हैं। यह सामूहिक प्रयास वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ाता है।
यह लोगों को शोध से जुड़ने और उसमें भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित करता है। सिटिज़ेन साइंस इंडिया वॉलन्टियर्स को देशभर की प्रभावशाली परियोजनाओं से जोड़ते हुए इस तरह की पहलों के लिए एक केन्द्र के तौर पर कार्य करता है।
वैश्विक प्लेटफॉर्म्स
ईबर्ड: यह एक वैश्विक नागरिक मंच है जो पक्षी प्रेमियों के ज्ञान का इस्तेमाल शोध, संरक्षण और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए करता है। पक्षियों की सूची इकट्ठा करके और उसे संग्रहीत करके ईबर्ड वैज्ञानिक खोजों और संरक्षण से जुड़े प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सबको मुफ्त में डेटा तक पहुँच प्रदान करता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म लोगों को पक्षियों से जुड़ी सूचियों, तस्वीरों और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स को सम्भालने के साधन उपलब्ध कराता है जिससे पक्षियों को देखने, उन्हें पहचानने और उनके बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करने का लोगों का अनुभव और बेहतर हो जाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म यह भी बताता है कि कौन-सी प्रजाति के पक्षी कहाँ देखे गए और जब कोई पक्षी कहीं नज़र आता है तो उसकी सूचना भी प्रदान करता है।
ईबर्ड हर साल 10 करोड़ से भी ज़्यादा पक्षियों के अवलोकनों को इकट्ठा करता है और इसमें लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से यह दुनिया की सबसे बड़ी जैव विविधता से सम्बन्धित विज्ञान परियोजनाओं में से एक बन गया है। इसके प्रबन्धन का काम कॉर्नेल लैब ऑफ ऑर्निथोलॉजी द्वारा किया जाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म दुनियाभर के संगठनों, विशेषज्ञों और पक्षी-प्रेमियों के सहयोग के ज़रिए फल-फूल रहा है।
ग्लोबएटनाइट: यह दुनियाभर के लोगों की भागीदारी से चलनेवाला वैज्ञानिक अभियान है जो कि प्रकाश प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम करता है। इसके लिए यह लोगों को रात के आकाश की चमक मापने और उनके अवलोकनों को ऑनलाइन जमा करने के लिए आमंत्रित करता है।
प्रकाश प्रदूषण ऊर्जा के इस्तेमाल, वन्यजीवों, इन्सानों के स्वास्थ्य और तारों को देखने की हमारी क्षमता पर असर डालता है। 14 वर्षों में 180 देशों से 200,000 से भी अधिक माप (आँकड़े) एकत्र करने के साथ, ग्लोब एट नाइट प्रकाश प्रदूषण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने वाली दुनिया की सबसे सफल पहल है। यह लोगों को विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने में सशक्त बनाती है।
हेरिटेज क्वेस्ट: यह नीदरलैंड की एक नागरिक विज्ञान परियोजना है। इसके तहत अभी तक नहीं खोजी गई पुरातात्विक धरोहर की खोज में पुरातत्वविदों की मदद करने के लिए वॉलन्टियर्स को इस परियोजना में शामिल किया जाता है।
यह पहल दर्शाती है कि किस तरह से नागरिक विज्ञान का विस्तार केवल प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्रों तक न होकर पुरातत्व विज्ञान तक हो सकता है। यह भारत सहित दुनिया के अन्य क्षेत्रों में इस तरह कि पहल किए जा सकने की सम्भावना को दर्शाती है।
आईनैचुरलिस्ट: यह एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ दुर्लभ प्रजातियों से लेकर वनस्पतियों और जीवों तक, हरेक अवलोकन जैवविविधता विज्ञान में योगदान देता है। यहाँ पर लोग जो डेटा जमा करते हैं उसे वैज्ञानिक डेटा का संग्रह और व्यवस्थित करके रखनेवाली जगहों से साझा किया जाता है। इसमें ग्लोबल बायोडाइवर्सिटी इनफार्मेशन फ़ैसिलिटी (GBIF) जैसी जगहें शामिल हैं। इससे दुनियाभर में शोध और संरक्षण के प्रयासों में मदद मिलती है। इसमें भागीदारी करना बहुत ही आसान है। इसके लिए वॉलन्टियर्स को वैज्ञानिक ज्ञान का अवलोकन करने और उसमें योगदान देना होता है।
यूनिस्टेलर: यूनिस्टेलर समुदाय ऐसे विज्ञान को समर्पित है जिसमें साधारण लोग वैज्ञानिकों के साथ मिलकर अध्ययन और शोध में हिस्सा लेते हैं। इसमें नौसिखिए और पेशेवर वैज्ञानिक ब्रह्माण्ड की खोज के लिए मिलकर काम करते हैं। चूँकि पेशेवर खगोल विज्ञानी सारा ज़रूरी अकेले डेटा इकट्ठा नहीं कर सकते, इसलिए नागरिक वैज्ञानिक खगोलीय जानकारी का अवलोकन, संग्रह और उसका विश्लेषण करके योगदान देते हैं। कौतूहल और जुनून से प्रेरित ये वॉलन्टियर अन्तरिक्ष के बारे में हमारी समझ को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ज़ूयूनिवर्स: यह दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जिसमें आम लोग शोध में हिस्सेदारी करते हैं। यह नई खोजें करने में पेशेवर शोधकर्ताओं की मदद करने में वॉलन्टियर्स को समर्थ बनाता है। यह सभी के लिए खुला है, चाहे उनकी विशेषज्ञता कुछ भी हो और इसकी बदौलत प्रतिभागी उनके खुद के कम्प्यूटर से असल वैज्ञानिक और ऐतिहासिक डेटा का विश्लेषण कर पाते हैं।
वॉलन्टियर विज्ञान और मानविकी जैसे विषयों से सम्बन्धित विविध प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी करते हैं। इससे शोध की प्रक्रिया में तेज़ी लाने में मदद मिलती है, जिसे अन्यथा पूरा करना मुश्किल होता।
ज़ूयूनिवर्स में ‘टॉक’ नाम का एक खास विचार-विमर्श का मंच है, जहाँ वॉलन्टियर्स शोधकर्ताओं के साथ और एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। यह मंच जानकारी को तुरन्त टैग करने, उसका गहन विश्लेषण करने और यहाँ तक कि लोगों द्वारा आपस में मिल-जुलकर हासिल की गई समझ के ज़रिए अप्रत्याशित खोजों के मौके देता है। चर्चाओं में शामिल होकर वॉलन्टियर शोध को आकार देने और वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
Note: This article first appeared in Samuhik Pahal in English with the title ‘The many ways of democratizing knowledge through citizen science intiatives.’
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