प्रकृति शिक्षा के लिए संसाधन
यह लेख प्रकृति शिक्षा से जुड़े चुने हुए संसाधनों का संग्रह पेश करता है, जो पाठकों को बहुमूल्य जानकारी और ज्ञान प्रदान करते हैं।

Kyari Eco club group picture
सामूहिक पहल के इस अंक के लिए रोशनी रवि ने प्रकृति शिक्षा पर आधारित पाठ्य संसाधनों का चयन और संकलन किया है। ये संसाधन पाठकों को मूल्यवान अन्तर्दृष्टि और ज्ञान प्रदान करते हैं।
प्राकृतिक दुनिया के अजूबों से लोगों को अवगत कराने के लिए हम किन-किन संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं? यहाँ हम प्रकृति की शिक्षा से सम्बन्धित संसाधनों को विविध प्रारूपों में प्रस्तुत कर रहे हैं। ये संसाधन भारत के विभिन्न भागों से लिए गए हैं और इन्हें विभिन्न आयु वर्ग के और सीखने के अलग-अलग स्तरों वाले बच्चों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। हम इनमें से कुछ संसाधनों के बनने की प्रक्रिया भी साझा कर रहे हैं ताकि अपने स्थानीय सन्दर्भों और लक्षित वर्गों (जिनके लिए सामग्री बनाई जा रही है) को ध्यान में रखते हुए आपको अपनी खुद की सामग्रियाँ बनाने की प्रेरणा मिल सके।
टॉकिंग बर्ड्स: अर्ली बर्ड्स की मोबाइल फ़्रेंडली और इंटरैक्टिव पोस्टर शृंखला, जिसमें भारत के विभिन्न आवासों में पाई जाने वाली चिड़ियों को उनकी आवाज़ों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
संसाधन का प्रकार: अर्ली बर्ड, नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ़) द्वारा प्रकाशित इन्टरैक्टिव डिजिटल पोस्टर्स
भाषाएँ: 10 भाषाएँ: अँग्रेज़ी, असमिया, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु
यह संसाधन किसके लिए है?
पक्षी देखने के शौकीन बच्चों और वयस्कों के लिए, जिन्होंने अभी-अभी इसकी शुरुआत की हो!
संसाधन के बारे में: अर्ली बर्ड के इन्टरैक्टिव डिजिटल पोस्टर्स को मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप तक, कहीं भी देखा जा सकता है। इन पोस्टर्स में विभिन्न आवासों में रहनेवाले आम भारतीय पक्षियों की तस्वीरें हैं। उपयोगकर्ता किसी भी चिड़िया पर क्लिक करके उसकी बड़ी तस्वीर, नाम और उसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें देख सकता है। यही नहीं आप उस पक्षी की आवाज़ भी सुन और सीख सकते हैं!
इस संसाधन के बनने के पीछे की कहानी: अर्ली बर्ड की टीम ने फोटोग्राफरों, चित्रकारों और डिज़ाइनरों के साथ मिलकर फ़्लैशकार्ड्स, पोस्टर और एक्टिविटी शीट्स सहित बहुत-से संसाधन तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल लोगों को हमारे आसपास आसानी से देखी जा सकनेवाली चिड़ियों से अवगत कराने के लिए किया जा सकता है। शुरुआत में, उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले पक्षियों के ऐसे पोस्टर बनाए जिनको आसानी से कक्षाओं में प्रदर्शित किया जा सके। भारत के पक्षियों को लोकप्रिय बनाने के लिए मैपयूनिटी के साथ मिलकर ऐसे इंटरैक्टिव डिजिटल पोस्टर बनाए गए जो ऑनलाइन सीखने के लिए उपयुक्त हों।
संसाधन का लिंक/सम्पर्क: इन्टरैक्टिव पोस्टर्स https://www.early-bird.in/interactive
सम्पर्क: [email protected]

A-Z पिक्चर कार्ड्स: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जीव-जन्तु
संसाधन का प्रकार: फ़्लैश कार्ड्स
प्रकाशक: दक्षिण फाउंडेशन
भाषाएँ: अँग्रेज़ी यह संसाधन किसके लिए है? शुरुआती पाठकों के लिए और ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जीव-जन्तुओं के बारे में जानना चाहता हो।
संसाधन के बारे में: A से लेकर Z तक के इन पिक्चर कार्ड्स में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर और उसके आसपास देखे गए जानवरों को दर्शाया गया है। इस संसाधन को स्थान-आधारित शिक्षा के माध्यम से द्वीप समूहों पर रहने वाले बच्चों तक बुनियादी साक्षरता और अंक ज्ञान का कौशल पहुँचाने के लिए बनाया गया था। इन कार्डों पर ज़मीन पर रहने वाले और समुद्र में रहने वाले 26 जीवों के चित्र और उनके बारे में दिलचस्प बातें दी गई हैं – अँग्रेज़ी वर्णमाला का हरेक अक्षर किसी एक जीव को दर्शाता है! वे क्या खाते हैं और कहाँ रहते हैं से लेकर कार्ड्स पर द्वीप समूहों पर पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं के बारे में छोटी-छोटी मगर काम की बातें दी गई हैं। इन कार्ड्स और इन पर दी गई जानकारियों का इस्तेमाल खेल खेलने और प्रश्नोत्तरी के लिए किया जा सकता है।
इस संसाधन के बनने के पीछे की कहानी: इस संसाधन को दक्षिण की पर्यावरण शिक्षा की टीम ने चित्रकार सुभद्रा श्रीधरन के साथ मिलकर तैयार किया था। इन कार्ड्स को ट्रेजर्ड आइलैंड किताबों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, जो कि द्वीपों के बारे में एक सन्दर्भ आधारित और स्थान-आधारित पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम है। टीम इन कार्डों को ऐसे जिज्ञासु शिक्षकों और बच्चों की ज़रूरतों के अनुकूल भी मानती है जो अपने आसपास नज़र आने वाले जानवरों को और बेहतर तरीके से जानना चाहते हैं!
संसाधन का लिंक/सम्पर्क: A-Z Picture Cards – The Fauna of the Andaman and Nicobar Islands – Dakshin Foundation

PC- Dakshin Foundation
मैंग्रोव का जादू: ओडिशा के मैंग्रोव जंगलों से युवाओं का परिचय
संसाधन का प्रकार: एक्टिविटी बुक (पीडीएफ/हार्डकॉपी के रूप में उपलब्ध)
प्रकाशक: चले चलो, भुवनेश्वर ओडिशा
भाषाएँ: अँग्रेज़ी, उड़िया
यह संसाधन किसके लिए है? 13 साल या उससे ज़्यादा उम्र के बच्चों के लिए। मूल रूप से इसे ओडिशा के सरकारी स्कूलों में इको-क्लब्स के लिए एक संसाधन के तौर पर तैयार किया गया था।
संसाधन के बारे में: यह किताब सीखने-सिखाने के गतिविधि-आधारित तरीकों का इस्तेमाल करके बच्चों और युवाओं को मैंग्रोव वनों द्वारा निर्मित एक खास आवास और वहाँ के पौधों और जानवरों से परिचित कराती है। इस किताब में मानचित्रों, प्रयोगों, चित्रों और शब्दावली को शामिल किया गया है, जिनकी मदद से न सिर्फ ओडिशा, बल्कि भारत के बाकी हिस्सों में पाए जाने वाले मैंग्रोव के बारे में भी जानकारी हासिल की जा सकती है। जब बच्चों को मैंग्रोव की पौधशालाओं (नर्सरियों) और जंगलों की सैर पर ले जाया जाता है, तो उन्हें कक्षा में सीखी गई बातों का और नज़दीकी से अवलोकन करने का मौका मिलता है। किताब के साथ-साथ गीतों, पहेलियों और फ़्लैशकार्ड्स का इस्तेमाल छात्रों के लिए सीखने के इस अनुभव को मज़ेदार बना देता है।
इस संसाधन के निर्माण के पीछे की कहानी: चले चलो की टीम 2005 से मैंग्रोव को उगाने, संरक्षित करने और इसके बारे में जानकारी देने पर काम कर रही है। इस किताब को कई-कई बार जंगलों में जाने के बाद तैयार किया गया ताकि मैंग्रोव के इकोसिस्टम के बारे में शिक्षकों और बच्चों में कौतूहल पैदा किया जा सके, जिसके वे इतने करीब रहते थे। वन विभाग और स्थानीय समुदायों के साथ बातचीत से इस संसाधन को तैयार करने में काफी मदद मिली।
सम्पर्क: रंजीत स्वैन, चले चलो के निदेशक | [email protected]

शेल शॉकर: भारत के कछुओं पर आधारित कार्डों का एक खेल
संसाधन का प्रकार: कार्ड का खेल
प्रकाशक: टर्टल सर्वाइवल अलायंस इंडिया (TSAI)
भाषाएँ: अँग्रेज़ी
यह संसाधन किसके लिए है? 10 साल से ज़्यादा उम्र वालों के लिए संसाधन के बारे में: क्या कार्ड का कोई खेल कछुओं और टर्टल्स के बारे में सीखने में आपकी मदद कर सकता है? ‘शेल शॉकर’ एक नवाचारी कार्ड का खेल है जिससे भारत में पाई जाने वाली कछुओं की कई प्रजातियों के बारे में दिलचस्प बातें जानने को मिलती हैं। यह एक मज़ेदार और आसानी से खेला जा सकने वाला खेल है जिसे छोटे समूहों में खेला जा सकता है। हरेक कार्ड से खेलनेवालों को कछुओं के खोल की लम्बाई, वज़न, उनके खान-पान, अंडों की संख्या, उनके आवास और उनके संरक्षण की स्थिति के बारे में जानने के मौके मिलते हैं।
इस संसाधन के बनने के पीछे की कहानी: टर्टल सर्वाइवल अलायंस इंडिया की टीम ने इसे बनाया था। इस खेल ने लॉकडाउन के दौरान आकार लिया। कई ऑनलाइन बैठकों और कई विषयों के विशेषज्ञों की एक टीम के प्रयासों के ज़रिए इसे साकार किया गया। इन कार्ड्स में ढेर सारी जानकारी दी गई है। उभरते हुए जीव विज्ञानियों और छात्रों द्वारा आसानी से इस्तेमाल की जा सकनेवाली मार्गदर्शिकाओं के तौर पर फील्ड में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है!
संसाधन का लिंक /सम्पर्क: अगर आप कोई स्कूल, लाइब्रेरी या लर्निंग सेंटर चलाते हैं तो [email protected] for copies को ईमेल लिखें।
व्यक्तिगत प्रतियों को खरीदने के लिए लिंक: https://www.pashoopakshee.com/product-page/shell-shocker-card-game

Photo Credit- Aniruddha Ghosh
मंगार बानी के पेड़: एक सचित्र मार्गदर्शिका और गतिविधि पुस्तिका
संसाधन का प्रकार: मार्गदर्शिका और गतिविधि पुस्तिका
प्रकाशक: सैंक्चुअरी नेचर फाउंडेशन (मड ऑन बूट्स) और मंगार इको क्लब
भाषाएँ: हिन्दी और अँग्रेज़ी
यह संसाधन किसके लिए है? मंगार इको क्लब के सदस्यों और मंगार बनी में आने वाले लोगों के लिए।
संसाधन के बारे में: यह किताब द्विभाषी है और इसमें दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित मंगार बानी के पवित्र जंगलों में पाई जाने वाली पेड़ों की 12 मशहूर प्रजातियों के बारे में बताया गया है। यह किताब चित्रों के ज़रिए मंगार के हर पेड़ पर ध्यान केन्द्रित करती है और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक जानकारी और वहाँ के दिलचस्प प्राकृतिक इतिहास की बात भी करती है। इसमें आपको पेड़ के हिस्सों के वर्णन मिलेंगे (जिससे आपको पेड़ का नाम पहचानने में मदद मिलेगी), पेड़ में फूल आने और फल लगने के पैटर्न की जानकारी मिलेगी, पेड़ सबसे अच्छी तरह से कहाँ पर बढ़ेगा इसकी जानकारी मिलेगी और साथ ही यह भी पता चलेगा कि लोग इन पेड़ों को कैसे इस्तेमाल करते हैं और इनसे खुद को कैसे जोड़ते हैं। इसके साथ-साथ, इसमें रंगने की मज़ेदार गतिविधियाँ और खेल भी दिए गए हैं जो पक्के तौर पर आपके आसपास की प्रकृति को जानने, समझने और उससे जुड़ने में आपकी मदद करेंगे!
इस संसाधन के पीछे की कहानी: यह किताब एक ऐसे प्रोजेक्ट का नतीजा है जिसे सैंक्चुअरी मड ऑन बूट्स के फैलो सुनील हरसाना और स्वतंत्र चित्रकार और डिज़ाइनर लाबोनी रॉय ने मिलकर किया था। यह संसाधन मंगार इको क्लब के बच्चों के साथ-साथ मंगार जंगल में आने वाले आगंतुकों के लिए तैयार किया गया था। इसका मकसद एक आसानी से उपलब्ध पुस्तिका के ज़रिए बच्चों को उनके परिवेश और स्थानीय इकोसिस्टम के बारे में सीखने के लिए प्रोत्साहित करना था। यह द्विभाषी किताब पढ़नेवालों को दोनों भाषाओं में नए शब्द सीखने में भी मदद करती है।
संसाधन का लिंक/ सम्पर्क: मंगर बानी जाएँ और सुनील हरसाना से बात करके अपनी एक प्रति हासिल करें। या फिर लाबोनी रॉय को [email protected] ईमेल लिखें।

पक्के के जीव-जन्तु: रंग भरने वाली किताब और नेचर जर्नल
संसाधन का प्रकार: एक्टिविटी बुक (पीडीएफ/हार्डकॉपी के रूप में उपलब्ध)
प्रकाशक: पूर्वी हिमालय कार्यक्रम, नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ़)
भाषाएँ: अँग्रेज़ी
यह संसाधन किसके लिए है? पक्के टाइगर रिज़र्व में और उसके आसपास रहनेवाले बच्चों और बड़े लोगों के लिए। साथ ही, ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए जो पक्के के जीव-जन्तुओं के बारे में जानना चाहता हो!
संसाधन के बारे में: यह एक अनूठा संसाधन है, जिसे रंग भरने और प्रकृति के बारे में लिखने के माध्यम से वन्यजीवों से गहरा जुड़ाव बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस एक्टिविटी बुक में रंग भरने के लिए सरल और विस्तृत चित्रों वाले पृष्ठ हैं। इस पुस्तिका को इस इरादे से तैयार किया गया है ताकि इस्तेमालकर्ता को रंग भरने की प्रक्रिया को समझने और उसका आनन्द लेने में मदद मिल सके। चित्रों के साथ-साथ अवलोकन और नोट्स लिखने के लिए सादे पन्ने भी दिए गए हैं। इसमें सामान्य रूप से पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं के साथ-साथ क्लाउडेड लेपर्ड जैसे दुर्लभ जीवों को शामिल किया गया है।
संसाधन के बनने के पीछे की कहानी: एनसीएफ की पूर्वी हिमालय की टीम पक्के और उसके आसपास के इलाकों में स्कूली बच्चों के साथ में नेचर कैम्प आयोजित करती है। यह संसाधन कोरोना महामारी के दौरान समाने आया जब वे इन कार्यक्रमों का आयोजन नहीं कर पा रहे थे। यह संसाधन बच्चों की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने और उन्हें उनके आसपास दिखाई देने वाले वन्य जीवों को पहचानने के उनके खुद के अनुभवों को दर्ज करने के लिए प्रेरित करता है।
संसाधन का लिंक/सम्पर्क: Wildlife of Pakke
सानिया चपलोद|: [email protected]

Photo Credit- Arushi Mehta
क्यारी की चिड़ियाँ
संसाधन का प्रकार: निर्देशिका/ सूचना पुस्तिका
प्रकाशक: क्यारी इकोक्लब और तितली ट्रस्ट
भाषाएँ: हिन्दी और अँग्रेज़ी
यह संसाधन किसके लिए है? उत्तराखण्ड के स्कूलों के इको क्लबों के लिए।
संसाधन के बारे में: यह एक ऐसी पुस्तिका है जिसे बच्चों ने ही बच्चों के लिए बनाया है। इसमें उत्तराखण्ड के पावलगढ़ संरक्षण अभयारण्य (जिसे अब सीतावनी संरक्षण अभयारण्य के नाम से जाना जाता है) की सीमा के पास स्थित क्यारी गाँव में पाए जाने वाले अलग-अलग प्रकार के पक्षियों की जानकारी दर्ज है। यह संसाधन क्यारी गाँव में सामान्य तौर पर पाए जाने वाले पक्षियों के बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों और कहानियों का एक आकर्षक प्रदर्शन है। यह वास्तव में मिलजुलकर की गई एक कोशिश है जो बच्चों के अनुभवों को पक्षियों को देखने और पहचानने की शुरुआत करने वाले बाकी लोगों के लिए एक संसाधन के तौर पर सँजोती है।
इसे बनाने की प्रक्रिया: क्यारी क्लब के बच्चों ने प्रकृति की अपनी सैर के दौरान जिन पक्षियों को देखा उनके बारे में लिखना शुरू किया। उन्होंने अपने अवलोकनों और सीखों को चित्रों और कहानियों का रूप दिया जिसे इस पुस्तिका में शामिल किया गया है।
संसाधन का लिंक/सम्पर्क: Birds of Kyari – Wipro earthian
संजय सोंधी: [email protected]

हमें उम्मीद है कि इन चुनिन्दा संसाधनों से आपको अपने आसपास के परिवेश से जुड़ने और उससे सीखने में मदद करने वाली सामग्री को खोजने में मदद मिली होगी। साथ ही, इनसे आपको अपने छात्रों के साथ मिलकर अपने खुद के संसाधन बनाने के लिए नए विचार भी मिले होंगे!
इस बारे में आगे और अधिक पड़ताल करने के लिए यहाँ प्रकृति की शिक्षा से जुड़े कुछ संसाधनों के स्रोत दिए गए हैं:
नेचर साइंस इनीशिएटिव द्वारा तैयार की गई नेचर विद्या: https://www.naturevidya.org/
पल्लुयिर ट्रस्ट फ़ॉर नेचर एजुकेशन एंड रिसर्च : https://palluyirtrust.org/
राउंड ग्लास सस्टेन के इन्फोग्राफ़िक्स और एक्सप्लेनर्स : https://roundglasssustain.com/explore-infographics
ज़ू आउटरीच ऑर्गनाइज़ेशन: https://zooreach.org/
स्वीकृति: हम अरुणा मंजूनाथ, गरिमा भाटिया, लाबोनी रॉय, पीयूष सेखसरिया, रंजीत स्वेन, सानिया चपलोद, संजय सोंधी और सौरभ दीवान को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने नेचर एजुकेशन से जुड़ी सामग्री को संकलित करने में अपना समय दिया और इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
No approved comments yet. Be the first to comment!