कार्यस्थल में वेलबीइंग
यह लेख नागरिक समाज संगठनों में कार्यस्थल पर वेलबीइंग की बात करते हुए अत्यधिक काम की वजह से होनेवाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तनाव व काम में अरुचि जैसे मुद्दों को उजागर करता है।

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गैलप की ‘स्टेट ऑफ़ ग्लोबल वर्कप्लेस’ रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में केवल 23 फीसदी कर्मचारी ही अपना काम कर रहे हैं। इसके यह मायने हैं कि 77 फीसदी अपना काम नहीं कर रहे हैं या फिर उनमें काम को लेकर अरुचि बहुत ज़्यादा है।
ऊपर दिए गए आँकड़ों के सन्दर्भ में किसी को ऐसा लग सकता है कि नागरिक समाज संगठनों के मामले में यह उतना बड़ा मुद्दा नहीं है। हालाँकि, वेलबीइंग प्रोजेक्ट की ‘वेलबीइंग इंस्पायर्स वेलडूइंग रिपोर्ट’ बदलाव लाने वालों में भी बर्नआउट और तनाव की व्यापकता को उजागर करती है। सामाजिक संस्थाओं को इस पर काम करना चाहिए।
किसी व्यक्ति का वेलबीइंग और जिन संस्थाओं में वे काम करते हैं, दोनों गहराई से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। ऐसे लोग जो पूरी जागरूकता के साथ अपनी खुद की वेलबीइंग का ध्यान रखते हैं, वे सामान्य तौर पर पूरे कार्यालय के वेलबीइंग और विशेष तौर पर अपने सहकर्मियों के वेलबीइंग में योगदान देने की सम्भावना रखते हैं। हालाँकि, संस्थागत स्तर पर समर्थन की कमी की वजह से अक्सर कार्यकर्ताओं में तनाव और काम को लेकर अरुचि आ जाती है।
यह कुछ वैसा ही है कि अण्डा पहले आया या मुर्गी। हालाँकि, ज़रूरी नहीं कि यह ऐसा ही रहे। बदलाव की पहल हमेशा अपनेआप से की जा सकती है। कार्यस्थल पर वेलबीइंग की शुरुआत तब होती है जब हरेक सजग व्यक्ति अपने स्वयं के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है। अपने भीतर झाँकने की प्रवृत्ति को विकसित करना इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इससे लोगों को अपने भीतर के विचारों के बारे में जागरूक बनने में मदद मिलती है। इससे वे दूसरे लोगों के आन्तरिक जीवन की गहराई और समृद्धि को लेकर भी संवेदनशील और जागरूक हो पाते हैं।
नियमित और व्यवस्थित अभ्यासों और प्रक्रियाओं की मदद से वेलबीइंग की ओर बढ़ने के सफर को सँवारा जा सकता है। कभी-कभी इसके लिए बाहरी मार्गदशन की ज़रूरत पड़ती है। वेलबीइंग को प्राथमिकता देनेवाली संस्थाएँ बना पाने के लिए कार्य-संस्कृति में कुछ बदलाव करने की ज़रूरत होती है।
इसके लिए अकसर नेतृत्व के स्तर पर इस समझ की ज़रूरत होती है कि वेलबीइंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और सचेत रूप से इसे हासिल करने की कोशिश की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि सम्बन्धित प्रक्रियाएँ वित्तीय से लेकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित प्रक्रियाओं, और मानव संसाधनों से सम्बन्धित नीतियों तक की एक पूरी शृंखला को कवर करती हैं।
कार्यस्थल पर वेलबीइंग पर ध्यान देना आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। कार्यस्थल पर कर्मचारियों की वेलबीइंग पर ध्यान देने से हमें हमारी संस्था के विकास के सफर पर ध्यान देने की ज़रूरी आवश्यकता, समर्थन देनेवाले और विकास में मदद करने वाले कार्यस्थलों को बनाने और जो हम कहते हैं उन बातों पर अमल करने में मदद मिल सकती है।
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