अपने इस लेख में लेखक एक ऐसी संस्था के बारे में बात कर रहे हैं जिसके वे सह-संस्थापक थे। बाद में इस संगठन को एक मिलते-जुलते लक्ष्य वाले दूसरे नागरिक समाज संगठन में मिलाना पड़ा। वह इस लेख में उस नागरिक समाज संगठन की विकास-यात्रा और उससे उन्हें मिली सीख पर चर्चा कर रहे हैं।